कान्हा नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिले में फैला हुआ है। यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। कान्हा राष्ट्रीय कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिलों में स्थित भारत का एक अत्यंत प्रसिद्ध और विशाल राष्ट्रीय उद्यान है। यह उद्यान अपनी जैव विविधता, हरियाली, दुर्लभ वन्यजीवों और खासतौर पर रॉयल बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और रोमांचक जंगल सफारी के कारण यह राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1955 में की गई थी। प्रारंभ में इसे एक अभयारण्य के रूप में विकसित किया गया, लेकिन बाद में इसके महत्व और वन्यजीव संरक्षण को देखते हुए इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। आज यह भारत के सबसे अच्छे प्रबंधित टाइगर रिजर्व में से एक माना जाता है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है?
यदि आपके मन में यह प्रश्न है कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है, तो इसका सीधा उत्तर है –
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है।
यह उद्यान मध्य भारत के हृदय में स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंच योग्य है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है?
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है – यह सवाल अक्सर पर्यटक पूछते हैं।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिलों की सीमा में फैला हुआ है। यह क्षेत्र सतपुड़ा और मैकल पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है, जिससे यहां का वातावरण बेहद ठंडा और सुखद बना रहता है।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का भौगोलिक क्षेत्रफल
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान माना जाता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 940 वर्ग किलोमीटर है, जबकि बफर ज़ोन मिलाकर यह क्षेत्र और भी विस्तृत हो जाता है। विशाल क्षेत्रफल होने के कारण यहां वन्यजीवों को प्राकृतिक और सुरक्षित वातावरण मिलता है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक संरचना
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक संरचना इसे अन्य राष्ट्रीय उद्यानों से अलग बनाती है। यहां घने जंगलों के साथ-साथ खुले घास के मैदान (Meadows) भी देखने को मिलते हैं।
यहां पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष:
- साल
- बांस
- सागौन
- शीशम
- तेंदू
इसके अलावा इस उद्यान में 1000 से अधिक फूलदार पौधे पाए जाते हैं, जो इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में हजारों प्रकार की औषधीय वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। इनमें बेलों पर चढ़ने वाले पौधे, झाड़ियां और दुर्लभ औषधीय जड़ें शामिल हैं।
इन जड़ी-बूटियों का उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है, जिससे इस क्षेत्र का जैविक महत्व और भी बढ़ जाता है।
जल स्रोत और झीलें
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में:
- एक बड़ी प्राकृतिक झील
- कई छोटे-छोटे तालाब
- मौसमी नदियां
पाई जाती हैं। इन जल स्रोतों में विभिन्न प्रकार के जलीय पौधे, मेंढक, मछलियां और जल पक्षी रहते हैं, जो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान किसके लिए प्रसिद्ध है?
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान विशेष रूप से रॉयल बंगाल टाइगर और बारहसिंगा (Hard Ground Swamp Deer) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। यह वही स्थान है जहां से बारहसिंगा को विलुप्त होने से बचाया गया।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों की संख्या और विविधता अत्यंत प्रभावशाली है।
प्रमुख स्तनधारी जीव:
- बाघ
- तेंदुआ
- बायसन (गौर)
- बारहसिंगा
- सांभर
- चीतल
- चार सींग वाला मृग
- माउस हिरण
- भौंकने वाला हिरण
अन्य जानवर:
- भारतीय भेड़िया
- लोमड़ी
- लकड़बग्घा
- सुस्त भालू
- जंगली सूअर
- जंगली बिल्ली
- लंगूर और मकाक
सरीसृप और पक्षी
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में:
- 300 से अधिक प्रजातियों के सांप, जिनमें अजगर और वाइपर शामिल हैं
- सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी, जिनमें प्रवासी पक्षी भी आते हैं
कई पक्षी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं, जिन्हें यहां सुरक्षित रखा गया है।
जंगल सफारी का अनुभव
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है। यहां प्रशिक्षित गाइड और अनुभवी ड्राइवर के साथ जीप सफारी कराई जाती है।
सफारी का समय:
जुलाई, अगस्त, सितंबर – पार्क बंद रहता है
15 अक्टूबर से 15 फरवरी – सुबह और शाम
मार्च से जून – समय में बदलाव

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सही समय
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और वन्यजीव देखने की संभावना अधिक होती है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की तस्वीरें
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की तस्वीरें इसकी वास्तविक सुंदरता को दर्शाती हैं। घने जंगल, खुले मैदान, बाघों की दहाड़ और हिरणों के झुंड यहां की पहचान हैं। यह स्थान वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है।
आसपास के पर्यटन स्थल
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास:
- मंडला के धार्मिक स्थल
- बालाघाट के जलप्रपात
- नर्मदा नदी के घाट
भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
निष्कर्ष
बालाघाट और मंडला जिलों में फैला कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश की शान है। प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और रोमांच से भरपूर यह स्थान हर प्रकृति प्रेमी को एक बार अवश्य देखना चाहिए।

