हिन्दू धर्म में पंचांग का विशेष स्थान है। पंचांग के अनुसार ही व्रत, त्योहार, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों का निर्धारण किया जाता है। वर्ष 2026 में आने वाली पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति और एकादशी तिथियाँ धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि 2026 में कौन-कौन से व्रत और तिथियाँ आएँगी, उनका क्या महत्व है और उन्हें सही विधि से कैसे किया जाए। इसी उद्देश्य से यह लेख तैयार किया गया है, ताकि आपको एक ही जगह पूरी और प्रामाणिक जानकारी मिल सके।
हिन्दू पंचांग क्या है और इसका महत्व
हिन्दू पंचांग पाँच अंगों से मिलकर बनता है —
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।
इन्हीं के आधार पर व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठान तय किए जाते हैं।
पंचांग केवल कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह जीवन को धर्म, कर्म और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम है। वर्ष 2026 में पंचांग के अनुसार आने वाली प्रमुख तिथियाँ — पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति और एकादशी — जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और पुण्य प्रदान करती हैं।
पूर्णिमा 2026: महत्व, लाभ और धार्मिक मान्यता
पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में विद्यमान रहता है। यह तिथि मानसिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।
पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
- चंद्र देव की विशेष पूजा
- सत्यनारायण व्रत का आयोजन
- स्नान और दान से पुण्य की प्राप्ति
- मानसिक तनाव में कमी
2026 की प्रमुख पूर्णिमा
- पौष पूर्णिमा
- माघ पूर्णिमा
- फाल्गुन पूर्णिमा (होली)
- बुद्ध पूर्णिमा
- गुरु पूर्णिमा
- श्रावण पूर्णिमा
- शरद पूर्णिमा
- कार्तिक पूर्णिमा
पूर्णिमा पर क्या करें
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
- चंद्रमा को दूध या जल अर्पित करें
- गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करें
- सत्यनारायण कथा का पाठ
पूर्णिमा पर क्या न करें
- तामसिक भोजन से बचें
- क्रोध और वाद-विवाद न करें
अमावस्या 2026: पितृ तर्पण और आत्मशुद्धि का दिन
अमावस्या को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए सबसे उत्तम तिथि माना गया है। इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, इसलिए यह आत्मचिंतन और साधना का समय होता है।
अमावस्या का महत्व
- पितृ दोष शांति
- पितरों का आशीर्वाद
- मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि
2026 की प्रमुख अमावस्या
- मौनी अमावस्या
- सोमवती अमावस्या
- वैशाख अमावस्या
- महालया अमावस्या
- दीपावली अमावस्या
अमावस्या पर क्या करें
- पितरों के लिए जल तर्पण
- पीपल वृक्ष की पूजा
- दान और सेवा कार्य
- शिव और विष्णु पूजा
अमावस्या पर क्या न करें
- शुभ कार्य आरंभ न करें
- नकारात्मक सोच से बचें
संक्रांति 2026: सूर्य परिवर्तन और दान का पर्व
जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, उसे संक्रांति कहा जाता है। वर्ष में कुल 12 संक्रांतियाँ होती हैं और प्रत्येक का अपना विशेष महत्व होता है।
संक्रांति का धार्मिक महत्व
- सूर्य देव की आराधना
- ऋतु परिवर्तन का संकेत
- दान-पुण्य का विशेष फल
2026 की प्रमुख संक्रांतियाँ
- मकर संक्रांति
- मेष संक्रांति
- कर्क संक्रांति
- सिंह संक्रांति
- तुला संक्रांति
संक्रांति पर दान का महत्व
- तिल और गुड़
- कंबल और वस्त्र
- अन्न और पात्र
मान्यता है कि संक्रांति पर किया गया दान कई गुना फल देता है।
एकादशी 2026: भगवान विष्णु का प्रिय व्रत
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं और प्रत्येक का अलग महत्व बताया गया है।
एकादशी व्रत का महत्व
- पापों से मुक्ति
- मोक्ष की प्राप्ति
- मानसिक और शारीरिक शुद्धि
2026 की प्रमुख एकादशी
- वैकुण्ठ एकादशी
- निर्जला एकादशी
- देवशयनी एकादशी
- देवउठनी एकादशी
एकादशी व्रत नियम
- अन्न का त्याग
- फलाहार या निर्जल व्रत
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ
- द्वादशी को पारण
2026 में व्रत रखने के आध्यात्मिक लाभ
- सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
- आत्मसंयम और अनुशासन
- मानसिक शांति
- धार्मिक चेतना का विकास
व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का माध्यम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
नहीं, श्रद्धा और क्षमता अनुसार व्रत किया जा सकता है।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी पर अन्न सेवन वर्जित माना गया है।
काला तिल, अन्न और वस्त्र दान श्रेष्ठ माना जाता है।
संक्रांति पर स्नान से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष
वर्ष 2026 की पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति और एकादशी तिथियाँ जीवन को धर्म, शांति और सकारात्मकता से जोड़ने का अवसर प्रदान करती हैं। यदि इन तिथियों का सही विधि और श्रद्धा से पालन किया जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है।
यह लेख आपको 2026 के पूरे हिन्दू पंचांग की एक जगह संपूर्ण जानकारी देता है, जिससे आपको बार-बार अलग-अलग स्रोत देखने की आवश्यकता नहीं होगी।

