मथुरा के दर्शनीय स्थल

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देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर दूर मथुरा उत्तर प्रदेश में स्थित है। मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में माना जाता है। यमुना नदी के किनारे पर बसा हुआ यह शहर बहुत ही प्राचीन है। यहां पर भगवान श्री कृष्ण और दाऊजी महाराज से संबंधित बहुत धार्मिक स्थान है। हम आपको मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल के बारे में बताते हैं।

1- कृष्ण जन्मभूमि मंदिर –


भगवान श्री कृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। श्री कृष्ण जी जेल की कोठी में पैदा हुए थे अब उस स्थान पर कृष्ण जी का भव्य मंदिर बना हुआ है। जहां पर दर्शन करने के लिए हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं। श्री कृष्ण जन्मभूमि यमुना नदी के तट पर बना हुआ है। यहां पर जन्माष्टमी और होली में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मथुरा के भव्य मंदिरों में से यह एक है।


2- द्वारकाधीश मंदिर –

द्वारकाधीश मंदिर लगभग डेढ़ सौ साल पहले बनाया गया था। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को द्वारका के राजा के रूप में सजाया जाता है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण बिना मोरपंखी और बांसुरी के साथ स्थापित हैं। यह मंदिर अपने अद्भुत झूले उत्सव के लिए जाना जाता है। यहां पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

3- गोवर्धन –

मथुरा मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर गोवर्धन पर्वत है। मथुरा आने वाले श्रद्धालु गोवर्धन दर्शन के लिए जरूर आते हैं। मान्यता के अनुसार एक बार गांव में भयंकर बारिश और तूफान से बचने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पहाड़ी को अपनी एक उंगली पर उठा लिया था। इस पर्वत के नीचे पूरे गांव के लोग समा गए थे और अपनी जान बचाए थे। तब से गोवर्धन पर्वत को पवित्र माना जाता है। भक्तों द्वारा 23 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा की जाती है। मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने गांव के लोगों को बचाने के बाद इस पहाड़ी की पूजा करने के लिए कहा था, यही कारण है कि आज भी दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा मनाया जाता है।


4- बरसाना –

मथुरा मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर बरसाना स्थित है। यह माता राधा का जन्म स्थान माना जाता है। बरसाना ब्रजभूमि का क्षेत्र है। बरसाना में पहाड़ी पर श्री राधा रानी मंदिर स्थित है जिसे देखने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।


5- प्रेम मंदिर-

भगवान श्री कृष्ण का प्रेम मंदिर मथुरा में स्थित है। यह मंदिर कृपालु जी महाराज ने बनवाया था। यह मंदिर बहुत ही प्राकृतिक रूप से बनाया गया है। इस मंदिर में दो फ्लोर पर भगवान विराजमान है। भगवान श्री कृष्ण के साथ-साथ भगवान राम माता सीता जी भी यहां विराजमान है। धार्मिक स्थान होने के साथ-साथ पर्यटन स्थल भी है, यहां पर देश-विदेश के लोग घूमने के लिए आते हैं।

6- बल्देव मंदिर –

बल्देव मंदिर मथुरा से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई दाऊजी महाराज को समर्पित है। यहां पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।


7- रंग जी मंदिर –

रंग जी मंदिर वृंदावन में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह है परंतु इस मंदिर की बाहरी डिजाइन उत्तर भारतीय मंदिरों की तरह है।

8- इस्कॉन मंदिर –

इस्कॉन मंदिर भारत के सभी शहरों में स्थित है। इसे कृष्ण चेतना के नाम से भी जाना जाता है। यह इस्कॉन मंदिर का पहले मंदिर भगवान श्री कृष्ण और बलराम जी का मंदिर है। यह मंदिर प्रसिद्ध प्रेम मंदिर से थोड़ी दूर पर स्थित है। इस सन 1975 में बनाया गया था।


9- राधा रमण जी मंदिर –

राधा रमण जी मंदिर मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित है। यह मंदिर 1542 में बनाया गया था। यह मंदिर वृंदावन के ठाकुर के सात मंदिरों में से एक है। यह मंदिर बेहतरीन रूप से तैयार किया गया है, यह मथुरा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

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10- रमन रेती मंदिर-

गोकुल मथुरा से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यहां पर रमण रेती नामक अवलोकिक जगह है। यह एक विशाल परिसर है, यहाँ हिरण काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यह मंदिर संतों के लिए तपस्या और तीर्थ यात्रियों के लिए आरामदायक क्षेत्र है। यहां पर अभिशाप कृष्ण आश्रम तथा प्राचीन रमण बिहारी आश्रम मंदिर प्रसिद्ध है। यहां पर दर्शन के लिए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं।

11- शनि मंदिर –

शनि देव महाराज का सिद्ध मंदिर मथुरा के नंद गांव में स्थित है। माना जाता है यहां पर शनि देव की वक्र दृष्टि का असर नहीं होता है। मान्यता के अनुसार साढ़े साती के कष्ट को झेल रहा व्यक्ति यदि सात शनिवार को यहां आकर शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ता है तो उससे शनि देव का प्रकोप खत्म हो जाता है। इस मंदिर को कोकिलावन धाम के नाम से भी जाना जाता है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में इसके साथ-साथ अन्य कई बड़े धार्मिक स्थल हैं, जहां पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। जन्माष्टमी और होली के आसपास मथुरा में श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है। भगवान के श्रद्धालुओं को यहां पर अवश्य आना चाहिए। मथुरा धार्मिक स्थल है इससे यहां पर सैकड़ो आश्रम है जहां पर श्रद्धालु जाकर कुछ समय व्यतीत करते हैं।

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